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भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग: इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की ओर बदलाव

अपडेट करने की तारीख: 6 मार्च 2025

भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जो बढ़ती पर्यावरणीय चिंताओं और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को अपनाने के लिए सरकारी पहलों द्वारा प्रेरित है। वायु प्रदूषण में वृद्धि और पेरिस समझौते के प्रति देश की प्रतिबद्धता को देखते हुए, भारत सरकार ने पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतियां लागू की हैं।



सरकारी पहल और नीतियां

भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा देने के लिए फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FAME) योजना शुरू की है। इस योजना में निर्माताओं और खरीदारों के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं, साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने की योजनाएं भी हैं। FAME पहल के दूसरे चरण (FAME II), जो 2019 में शुरू हुआ, का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन और वाणिज्यिक वाहनों में EVs के उपयोग का विस्तार करना है, जिससे इस बदलाव को और तेज किया जा सके।

इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) को 5% तक कम कर दिया गया है, जबकि पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों पर यह 28% है। इससे उपभोक्ताओं के लिए EVs अधिक किफायती हो गए हैं। सरकार EV बैटरियों जैसे प्रमुख घटकों के घरेलू उत्पादन को भी प्रोत्साहित कर रही है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और इलेक्ट्रिक वाहन अधिक सुलभ बन सकें।


बाजार की प्रतिक्रिया और विकास

भारतीय वाहन निर्माता तेजी से इस बदलाव को अपना रहे हैं और अपने लोकप्रिय मॉडलों के इलेक्ट्रिक संस्करण लॉन्च कर रहे हैं। टाटा मोटर्स, महिंद्रा और हीरो इलेक्ट्रिक जैसे प्रमुख निर्माता EV तकनीक में भारी निवेश कर रहे हैं। विशेष रूप से, टाटा मोटर्स ने अपने नेक्सॉन EV के साथ बड़ी सफलता प्राप्त की है, जो देश में सबसे अधिक बिकने वाली इलेक्ट्रिक कारों में से एक बन गई है।

इसके अलावा, एथर एनर्जी और ओला इलेक्ट्रिक जैसे स्टार्टअप्स विशेष रूप से दोपहिया EV सेगमेंट में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ये कंपनियां इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक को आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुलभ बना रही हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों में EVs की मांग बढ़ रही है।


चुनौतियां और अवसर

सकारात्मक दृष्टिकोण के बावजूद, भारत के EV बाजार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी सीमित है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। इसके अलावा, EVs और बैटरियों की उच्च लागत व्यापक स्वीकृति के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है। हालांकि, सरकार द्वारा घरेलू बैटरी निर्माण को बढ़ावा देने और चार्जिंग सुविधाओं में सुधार की योजनाएं लंबे समय में इन लागतों को कम करने में मदद कर सकती हैं।

भारत में EVs की बढ़ती मांग नई कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती है, विशेष रूप से बैटरी उत्पादन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में। विदेशी निवेशक और प्रौद्योगिकी कंपनियां भी इस बाजार में प्रवेश कर रही हैं, जिससे नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल रहा है।


आगे की राह

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की यात्रा अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन इसका विकास मार्ग आशाजनक दिख रहा है। जैसे-जैसे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा और लागत कम होगी, EVs की स्वीकृति में लगातार वृद्धि देखने को मिलेगी। सरकार के निरंतर समर्थन और नवाचार पर ध्यान देने के साथ, भारत के पास वैश्विक EV बाजार में एक प्रमुख नेता बनने की अपार संभावना है।

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